
दुनिया के प्रमुख आर्थिक मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के दावोस सम्मेलन में एक खास मुलाकात होने जा रही है। 146 वैश्विक कॉरपोरेट नेताओं के समूह में शामिल कुछ चुनिंदा भारतीय सीईओ बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आमने-सामने होंगे। यह आयोजन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की चर्चाओं के बीच हो रहा है, जो बाजारों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
भारतीय दिग्गजों में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, विप्रो के सीईओ थोमस जॉर्ज कुरियन, भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक सुनिल भारती मित्तल और इन्फोसिस के सलिल पारेख प्रमुख हैं। इनकी मौजूदगी भारत की वैश्विक व्यापारिक ताकत को रेखांकित करती है।
हालिया घटनाओं से साफ है कि दोनों देशों के संबंधों में गर्मजोशी बढ़ी है और ट्रेड डील पर जल्द ऐलान की उम्मीद है। दावोस में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, जर्मनी की चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन जैसे नेता भी शिरकत कर रहे हैं।
कॉरपोरेट जगत की भागीदारी रिकॉर्ड तोड़ रही है, जिसमें 1700 से अधिक बिजनेस लीडर शामिल हैं। इनमें एनवीडिया के जेन्सन ह्वांग, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई, गूगल डीपमाइंड के डेमिस हसाबिस, पलान्टिर के एलेक्स कार्प और ओपनएआई की सारा फ्रायर जैसे नाम हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने वैश्विक निवेशकों से भारत के सोलर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में निवेश की अपील की। ला काइस कंपनी के सीईओ चार्ल्स एमोंड और सीओओ सारा बुशार्ड के साथ उनकी बैठक में जलवायु निवेश पर गहन चर्चा हुई।
दावोस इस बार व्यापार, प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा के नए युग का प्रतीक बन रहा है, जिसमें भारत की भूमिका सर्वोपरि है।
