अंतरिक्ष यात्रा का रोमांच हर किसी को आकर्षित करता है, लेकिन इसकी राह में कई खतरनाक चुनौतियां हैं। सबसे प्रमुख है स्पेस रेडिएशन, जो पृथ्वी की चुंबकीय परत और वायुमंडल द्वारा हमें सुरक्षित रखता है। पृथ्वी पर हम मामूली प्राकृतिक विकिरण से घिरे रहते हैं, किंतु अंतरिक्ष में यात्री भारी मात्रा में ऊर्जावान कणों का सामना करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होते हैं।

इस विकिरण के तीन प्रमुख स्रोत हैं। पहला, वैन एलन बेल्ट जहां पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन कैद हैं। दूसरा, सूर्य की ज्वालाओं और कोरोनल मास इजेक्शन से निकलने वाले सौर कण। तीसरा, आकाशगंगा के बाहर सुपरनोवा से उत्पन्न गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणें, जिनका पूर्ण प्रतिबंध लगभग नामुमकिन है।
तात्कालिक प्रभावों में उल्टी, थकान, त्वचा में जलन शामिल हैं। दीर्घकालिक जोखिम कैंसर, हृदय रोग, मोतियाबिंद, तंत्रिका क्षति और प्रजनन संबंधी समस्याएं हैं। शोध बताते हैं कि भारी कण डीएनए को गहन नुकसान पहुंचाते हैं।
नासा की रणनीतियां प्रभावी हैं। अंतरिक्ष यान में पानी की परतें, पॉलीथीन, हाइड्रोजन युक्त सामग्री और बहुस्तरीय ढाल लगाई जाती हैं। रीयल-टाइम डिटेक्टर विकिरण मॉनिटर करते हैं। सोलर स्टॉर्म में यात्री सुरक्षित स्थानों पर शरण लेते हैं।
यात्रियों का चयन कठोर मानदंडों पर होता है, प्रशिक्षण में मानसिक मजबूती पर जोर। आईएसएस मिशन 6-12 माह के हैं, मंगल यात्रा 2-3 वर्ष। नए शोध उन्नत सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि चंद्रमा-मंगल अभियान सफल हों।
