
नई दिल्ली। भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए शांति बिल 2025 एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है। इंफोमेरिक्स रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह विधेयक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाओं को दूर कर तेजी लाएगा।
यह बिल 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 के नागरिक दायित्व कानून की जगह लेगा, जिसमें विकास, सुरक्षा, संरक्षा और दायित्व का एकीकृत ढांचा होगा। केंद्र सरकार अब सरकारी संस्थाओं, कंपनियों, जॉइंट वेंचर्स या व्यक्तियों को प्लांट निर्माण, संचालन और ईंधन उत्पादन की अनुमति दे सकेगी।
रिपोर्ट में अनुमान है कि वित्त वर्ष 2032 तक क्षमता 22 गीगावाट तक पहुंच सकती है। शुद्ध शून्य लक्ष्य और बढ़ती बिजली जरूरतों के बीच न्यूक्लियर आधार भार ऊर्जा के रूप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि नवीकरणीय स्रोत अनिश्चित रहते हैं।
मुख्य रेटिंग अधिकारी रोहित इनामदार ने कहा कि श्रेणीवार दायित्व सीमाएं और आपूर्तिकर्ताओं के लिए सीमित कानूनी जोखिम निवेशकों का भरोसा बढ़ाएंगे तथा निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करेंगे। हालांकि, टैरिफ प्रतिस्पर्धा, घरेलू विक्रेता तंत्र, ईंधन आपूर्ति और भंडारण पर निर्भरता बनी रहेगी।
शांति बिल भारत के ऊर्जा भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगा।