
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता सरकार की आर्थिक रणनीति का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि इस बजट में घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
यह बजट न केवल अर्थव्यवस्था को बल्कि आम नागरिकों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम है। सीतारमण ने बताया कि जीवन सरल बनाने, रोजगार सृजन, कृषि उत्पादन वृद्धि और घरेलू खरीदारी क्षमता बढ़ाने के सभी प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं।
उन्होंने वर्तमान समय को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ करार दिया, जब अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और महंगाई न्यूनतम स्तर पर है। यह उपलब्धि सरकार के निरंतर प्रयासों, सतर्क नियोजन और समयबद्ध निर्णयों का परिणाम है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत तथा नाममात्र वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मानव संसाधन विकास पर बोलते हुए मंत्री ने अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य बताया। चालू वर्ष के लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो रोजगार उत्पन्न करेगा, स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाएगा और चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहन देगा।
इसके अलावा, शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता को जोड़ने वाली उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति 2047 तक वैश्विक सेवा बाजार के 10 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने के उद्देश्य से आईटी, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, पर्यटन व रचनात्मक सेवाओं पर ध्यान देगी।
ये कदम भारत को वैश्विक पटल पर आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में स्थापित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।