
नई दिल्ली। उद्योग समर्थित अनुसंधान परियोजनाओं को गति देने वाली रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फंडिंग योजना इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि दो सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं फंड वितरण के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। पिछले साल 1 जुलाई को कैबिनेट द्वारा मंजूर हुई इस योजना को 3 नवंबर को प्रधानमंत्री ने औपचारिक रूप से लॉन्च किया था, जिसमें दिशानिर्देश, आवेदन प्रक्रिया और डिजिटल पोर्टल शामिल थे।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आरडीआई का मुख्य लक्ष्य उच्च जोखिम वाली लेकिन उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं को समर्थन देना है। साथ ही, प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करना भी उद्देश्य है, ताकि वैज्ञानिक खोजें जल्दी व्यावसायिक रूप ले सकें।
विभाग ने प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) को सेकंड लेवल फंड मैनेजर नियुक्त किया है। ये संस्थाएं उद्योग समर्थित प्रोजेक्ट्स के लिए प्रारंभिक फंडिंग संभालेंगी।
डॉ. सिंह ने जोर दिया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना आरडीआई का मूल मंत्र है। यह ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ावा देगी, जिससे अनुसंधान के परिणाम समाज और अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।
यह कदम भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए यह सुनहरा अवसर है, जो डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आसानी से उपलब्ध होगा।
सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विज्ञान संकल्प को साकार करेगी, जहां उद्योग और शोध का तालमेल नई ऊंचाइयों को छुएगा।