
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, ड्रोन निगरानी और आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू हो गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि ये प्रयास पूरे नेटवर्क में दुर्घटनाओं को रोकने और संचालन को सुगम बनाने के लिए हैं।
तकनीकी उन्नयन निरंतर प्रक्रिया है। एमवीआईएस सिस्टम एआई की मदद से ट्रेनों के लटकते या टूटे हिस्सों का पता लगाता है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर, डीएफसीसीआईएल और साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में पायलट यूनिटें चल रही हैं, जबकि मालगाड़ी कॉरिडोर में चार और लगेंगी। आरडीएसओ उद्योगों के साथ इसे और बेहतर बना रहा है।
ट्रैक पर पहियों की जांच के लिए 24 डब्ल्यूआईएलडी सिस्टम कार्यरत हैं। ओएमआरएस के 25 यूनिट बेयरिंग और पहियों की निगरानी करते हैं, जिसमें सिकंदराबाद मंडल का सिरपुर कागजनगर शामिल है। आईटीएमएस रेल-पटरी की खामियों को मशीन लर्निंग से पकड़ता है।
रायपुर में ड्रोन से ओवरहेड उपकरणों की थर्मल जांच पायलट स्टेज में है। त्रि-नेत्र सिस्टम कोहरे में लोको पायलट की सहायता करेगा। 26 फरवरी की नई रेल टेक पॉलिसी इनोवेशन को गति देगी। ये कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।