
रात्रि के काले आसमान में कभी-कभी एक के बाद एक चमकते ग्रहों का अद्भुत समूह दिखाई देता है, मानो वे एक सीधी रेखा में सजे हों। इसे ‘प्लैनेट परेड’ या ग्रहों की परेड कहा जाता है। नंगी आंखों से दिखने वाला यह नजारा आकाशप्रेमियों को रोमांचित कर देता है। भले ही यह बहुत दुर्लभ न हो, लेकिन हर बार इसका इंतजार उत्साहपूर्ण होता है।
खगोलशास्त्र में यह कोई तकनीकी पद नहीं, बल्कि दृश्य भ्रम है। सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर एक ही सपाट चक्रवृत्त (एक्लिप्टिक) में घूमते हैं, जो पृथ्वी से एक रेखा जैसा प्रतीत होता है। कंजंक्शन में ग्रह पास आते हैं, जबकि अपोजिशन में सूर्य के सामने चमकते हैं, जिससे परेड स्पष्ट हो जाती है।
नासा के अनुसार, पांच ग्रहों वाली यह परेड कई दिनों तक नजर आ सकती है। बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति व शनि नंगी आंखों से पहचाने जाते हैं—ये तारों से तेज चमकते और स्थिति बदलते हैं, इसलिए प्राचीन काल में इन्हें ‘घुमक्कड़’ कहा गया। यूरेनस व नेपच्यून दूर होने से धुंधले रहते हैं।
देखने के लिए सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से पहले आदर्श समय है। ग्रह क्षितिज से 10 डिग्री ऊपर हों, वरना वायुमंडलीय विकृति से छिप जाते हैं। प्रदूषण, इमारतें या बादल बाधा डालते हैं—साफ मौसम व खुले स्थान चुनें।
विशेषता यह कि बुध-शुक्र सूर्य के निकट रहते हैं। शुक्र महीनों तक संध्या तारा बनता है, बुध हफ्तों भर चमकता है। बाहरी ग्रहों से संयोग होने पर चार-पांच ग्रहों का जुलूस हफ्तों चलता रहता है।
यह परेड सौरमंडल की सुंदरता उजागर करती है, हमें ब्रह्मांड से जोड़ती है। अगली बार आसमान थाम लें।