
नोएडा के सेक्टर-40 में राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) के क्षेत्रीय केंद्र में क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (सीडीईआईसी) का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि माता-पिता ही बच्चे के जीवन के प्रथम और सर्वाधिक प्रभावी थेरेपिस्ट होते हैं। 23 जनवरी को दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने जोर दिया कि सही जानकारी और सहयोग से लैस माता-पिता किसी भी विकासात्मक देरी वाले बच्चे को कभी पिछड़ने नहीं देंगे।
सरकार की समावेशी प्रारंभिक सहायता व्यवस्था के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए डॉ. कुमार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था हस्तक्षेप को राष्ट्रीय दायित्व बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन के प्रथम छह वर्ष मस्तिष्क विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी के लिए निर्णायक हैं। नोएडा का यह केंद्र समयानुकूल, वैज्ञानिक और मानवीय सहायता प्रदान करने का प्रतीक है।
केंद्र को उत्कृष्टता का मॉडल बनाने के निर्देश देते हुए मंत्री ने उन्नत तकनीक, कुशल विशेषज्ञों और प्रमाणित विधियों पर बल दिया। परिवारों को विकास प्रक्रिया का अभिन्न अंग मानते हुए देखभालकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रमाणन सहित आयोजन करने को कहा। डॉ. कुमार ने सीडीईआईसी को आशा और नवाचार का केंद्र बनाने का संकल्प लिया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की अपर सचिव मनमीत कौर नंदा ने बताया कि यह 28वां सीडीईआईसी है, जो प्रारंभिक पहचान पर केंद्रित दृष्टिकोण दर्शाता है। केंद्र 0-6 वर्ष के बच्चों के लिए व्यावसायिक चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, वाक् थेरेपी, विशेष शिक्षा आदि सेवाएं देगा।
उद्घाटन के दौरान सुविधाओं का अवलोकन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सामग्री वितरण और वृक्षारोपण हुआ, जो विकास और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बना।