
पाकिस्तान में इंटरनेट सेवाओं का बुरा हाल 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी के ठीक पहले एक विवादास्पद ‘फायरवॉल’ सिस्टम को लेकर सुर्खियों में है। विरोधी रिपोर्ट्स ने जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, जहां पहले से ही धीमी स्पीड और बार-बार होने वाले ब्लैकआउट आम हो चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार अगले महीने की 5जी नीलामी से पूर्व इस फायरवॉल को बंद करने वाली है। लेकिन नेशनल असेंबली की आईटी समिति को दी गई जानकारी में अधिकारियों ने इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वेब मैनेजमेंट सिस्टम (डब्ल्यूएमएस) है, जो पूरी तरह सक्रिय है और ‘फायरवॉल’ केवल बोलचाल का शब्द है।
इस अस्पष्टता ने देशव्यापी उलझन बढ़ा दी। उपभोक्ता और कारोबार धीमी इंटरनेट गति से जूझ रहे हैं, जबकि समस्या की जड़ डब्ल्यूएमएस में है या सीमित स्पेक्ट्रम में, यह साफ नहीं। पाकिस्तान में मोबाइल सेवाओं के लिए मात्र 270 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे कम है, जहां औसत 700 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा है।
प्रति दस लाख आबादी पर स्पेक्ट्रम के मामले में पाकिस्तान का आंकड़ा 1.1 मेगाहर्ट्ज है, जबकि श्रीलंका में 15.2, वियतनाम में 7.4, भारत में 3.9, बांग्लादेश में 3.6 और इंडोनेशिया में 2.1 मेगाहर्ट्ज है। यह कमी सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
अगले महीने प्रस्तावित 5जी नीलामी मूल रूप से 2025 की शुरुआत में निर्धारित थी, लेकिन मूल्य निर्धारण विवादों के कारण टल गई। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेक्ट्रम बढ़ाना सेवा गुणवत्ता सुधारने और 5जी के लिए तैयार होने के लिए अनिवार्य है।
हाल के वर्षों में समुद्री केबल क्षति या सरकारी परीक्षणों के नाम पर कई रुकावटें आईं, जिनसे ऐप-आधारित कारोबारों को भारी नुकसान हुआ। इनकी आधिकारिक वजहें सामने नहीं आईं। यह अनिश्चितता तकनीकी उद्यमियों और निवेशकों में चिंता पैदा कर रही है। पाकिस्तान की तकनीकी केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के लिए मजबूत इंटरनेट जरूरी है। नीलामी से उम्मीदें बंधी हैं कि यह संकट हल होगा।