पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को 4 प्रतिशत से अधिक की उछाल आ गया। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का अप्रैल अनुबंध 111.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 4.10 प्रतिशत ऊपर है।

न्यूयॉर्क के मैक्स एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में 3.37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 99.57 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा। इस उछाल का कारण ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल का हमला है, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार माना जाता है।
ईरान ने जवाब में कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला बोला, जो वैश्विक गैस निर्यात का प्रमुख केंद्र है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन हमलों को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
कतर एनर्जी के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि शाम को रास लाफान पर मिसाइलें गिरीं, जिससे भारी क्षति हुई और आग लग गई। आपातकालीन टीमें तैनात कर आग बुझाई गई। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं, कोई हताहत नहीं।
भारत पर इसका बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात होता है। ईंधन महंगा होने से महंगाई बढ़ेगी। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा ढांचे पर अतिरिक्त हमलों का विरोध किया।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने गुस्से में साउथ पार्स पर हमला किया, लेकिन क्षति सीमित रही। क्षेत्र में तनाव चरम पर है, ईरान ने खाड़ी के ऊर्जा केंद्रों पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। बाजार अस्थिरता की आशंका से सतर्क हैं।
