
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजारों को हिला दिया है। अगर होर्मुज जलमार्ग बाधित होता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। बड़े पैमाने पर युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर को छू सकती है। यह अनुमान एक ताजा रिपोर्ट में दिया गया है।
वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 72.80 डॉलर के आसपास है। सीमित हमलों से 5-10 डॉलर की बढ़ोतरी संभव है, जबकि ईरानी तेल ढांचे को नुकसान से 10-12 डॉलर और ऊपर। शनिवार को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के परमाणु केंद्र, मिसाइल साइटें और कमांड पोस्ट तबाह हो गए। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई सहित आईआरजीसी के आला अधिकारी मारे गए। ईरान ने जवाब में मध्य पूर्व के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।
भारत पर असर गहरा। प्रति डॉलर वृद्धि से 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त आयात खर्च। होर्मुज से 20 फीसदी वैश्विक और भारत के 40 फीसदी से ज्यादा आयात।
शेयर बाजार में तेल आधारित सौदेबाजी बढ़ेगी। ऊर्जा-रक्षा मजबूत, वितरक, पेंट, टायर, एविएशन, केमिकल कमजोर। रुपया गिर सकता है, आरबीआई हस्तक्षेप करेगा। लंबे तनाव से शिपिंग, बीमा महंगा।
ओएनजीसी, ऑयल इंडिया को फायदा; एचएएल, बीईएल उछाल। यह संघर्ष ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दे रहा है।