
नई दिल्ली। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई श्रृंखला में महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी रहने की पूरी संभावना है। बैंक ऑफ बड़ौदा की शुक्रवार जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह नई व्यवस्था देशवासियों के बदलते खर्च के रुझानों को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करेगी और वैश्विक मापदंडों के अनुरूप नीति निर्माण को मजबूत बनाएगी।
रिपोर्ट में मुख्य महंगाई पर निगरानी की सलाह दी गई है, खासकर सोना-चांदी कीमतों में उछाल के जोखिम को देखते हुए। हालांकि, वस्तुओं के संतुलित भार के कारण 4±2 प्रतिशत के दायरे में स्थिरता की उम्मीद है। नई श्रृंखला मौद्रिक नीतियों के लिए अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी, जिसमें खाद्य वस्तुओं के मौसमी बदलावों को बेहतर समाहित किया गया है।
सीपीआई की टोकरी अब 299 से बढ़कर 358 वस्तुओं वाली हो गई है, जिसमें 1465 ग्रामीण, 1395 शहरी और 12 ऑनलाइन बाजार शामिल हैं। खाद्य भार 45.8 से घटकर 40.1 प्रतिशत हो गया। इसमें ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया, मूल्यवर्धित डेयरी, जौ, पेनड्राइव जैसी नई चीजें जोड़ी गईं, जबकि रेडियो, डीवीडी प्लेयर हटा दिए गए।
पुरानी श्रृंखला में सात माह से खाद्य महंगाई घटी थी, लेकिन नई में हल्की वृद्धि दिखी, जिसका कारण टमाटर-प्याज-आलू जैसे अस्थिर सब्जियों के भार में कटौती है। बैंक के ईसीआई के मुताबिक, फरवरी 2026 के प्रारंभिक 11 दिनों में जरूरी वस्तुओं की कीमतें सालाना 0.4 प्रतिशत गिरीं। सरकारी आपूर्ति उपाय खाद्य महंगाई को काबू में रखेंगे।
यह बदलाव सीपीआई को आधुनिक और सटीक बनाते हुए नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित होगा।