
नई दिल्ली। 1 मार्च 2026 से देश में वित्तीय क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो आम लोगों के बैंक खातों, आयकर रिटर्न, डिजिटल भुगतान और निवेश को प्रभावित करेंगे। केंद्र सरकार के बजट 2026-27 और आरबीआई, सेबी जैसी संस्थाओं के निर्देशों से ये सुधार सामने आ रहे हैं।
हर माह की तरह तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करेंगी। वैश्विक कच्चे तेल के दामों के आधार पर घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर महंगे या सस्ते हो सकते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा।
करदाताओं के लिए अच्छी खबर—संशोधित आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि अब 31 मार्च हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गलतियां सुधारने का पर्याप्त समय मिलेगा, पेनल्टी से बचाव संभव।
फाइनेंस बिल में ‘लेट रिविजन’ का प्रावधान जोड़ा गया। आकलन वर्ष समाप्ति के 9-12 माह के बीच संशोधन पर 5 लाख तक आय वालों को 1000 और उसके बाद 5000 रुपये शुल्क। आईटीआर-यू को पुनर्मूल्यांकन में मजबूत किया गया, 10% अतिरिक्त शुल्क के साथ।
आरबीआई के आदेश पर 31 मार्च 2026 को महावीर जयंती के बावजूद बैंक खुले रहेंगे, वित्तीय वर्ष के अंतिम लेनदेन सुनिश्चित करने को।
टीआरएआई का कदम—15 मार्च तक ब्रोकर्स 1600 नंबरों पर शिफ्ट, फर्जी कॉल्स से सावधान।
सेबी की योजना से म्यूचुअल फंड वितरकों को 1% प्रोत्साहन, अधिकतम 2000 रुपये।
एनएचएआई ने फास्टैग केवाईवी वैकल्पिक किया; 3 मार्च से डिजिटल वॉलेट में सब-वॉलेट।
मैसेजिंग ऐप्स सक्रिय सिम से लिंक अनिवार्य, फ्रॉड रोकने को। बैंक न्यूनतम बैलेंस औसत आधार पर, यूपीआई में बायोमेट्रिक सुरक्षा।
ये बदलाव वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाएंगे, लेकिन जागरूक रहना जरूरी।