
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेज रफ्तार से मजबूत हो रहा है। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में जीवीए 7.72 प्रतिशत बढ़ा, जो दूसरी तिमाही में 9.13 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस उछाल का राज है उच्च मूल्य वाले उत्पादन की ओर झुकाव, बेहतर औद्योगिक बुनियादी ढांचा और तकनीक का तेजी से अपनाना।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मध्यम-उच्च तकनीकी उद्योगों का योगदान मैन्युफैक्चरिंग जीवीए में 46.3 प्रतिशत है, जो उत्पादन संरचना के गुणवत्तापूर्ण बदलाव को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई है—कॉम्पीटिटिव इंडस्ट्रियल परफॉर्मेंस रैंकिंग में 2023 में 37वां स्थान हासिल किया, जो 2022 के 40वें से बेहतर है।
मैन्युफैक्चरिंग अब 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का इंजन बन चुका है, जिसमें सुधार, क्षेत्रीय प्रयास और मजबूत सप्लाई चेन की भूमिका अहम है। केंद्रीय बजट 2026-27 ने निवेश प्रोत्साहन, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित कदमों से इसे और बल दिया।
वित्त वर्ष 25-26 की पहली छमाही में औद्योगिक जीवीए सालाना 7 प्रतिशत बढ़ा। दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8 प्रतिशत उछला—दो साल का सर्वाधिक विस्तार। आईआईपी में मैन्युफैक्चरिंग 8.1 प्रतिशत बढ़ी, जिसमें कंप्यूटर-इलेक्ट्रॉनिक्स (34.9%), मोटर वाहन (33.5%) और अन्य परिवहन उपकरण (25.1%) ने अगुआई की। यह गति भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की ओर ले जा रही है।