
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार पकड़ रही है। मॉर्गन स्टैनली की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू और वैश्विक मांग के दमदार समर्थन से वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत के अनुमान से ऊपर जा सकती है। सोमवार जारी रिपोर्ट में वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने भारत की विकास क्षमता पर सकारात्मक नजरिया जताया है।
हाल के उच्च आवृत्ति आंकड़े घरेलू मांग में सुधार की पुष्टि करते हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि अनुकूल आर्थिक स्थिरता के बीच नीतियां विकासोन्मुख बनी रहेंगी। उपभोक्ता खर्च और निजी निवेश में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।
बाहरी मोर्चे पर भी चमक बरकरार है। वस्तु निर्यात को शुल्क दरों में भारी कमी और कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के सफल समापन से बल मिलेगा। ये कदम वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच भारत को मजबूत बनाएंगे।
संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी और जीवीए दोनों 7.8 प्रतिशत बढ़े, जो पिछली तिमाही से थोड़े कम हैं। सरकार ने आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है, जो अर्थव्यवस्था की नई संरचना को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करेगा।
नई श्रृंखला में असंगठित और डिजिटल क्षेत्रों का बेहतर मूल्यांकन, दोहरी अपस्फीति, आपूर्ति-उपयोग तालिकाएं और जीएसटी, ई-वाहन, पीएफएमएस जैसे नए स्रोत शामिल हैं। इससे पूरे वित्त वर्ष 2026 की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत हो गई, जो पहले 7.4 प्रतिशत थी।
मॉर्गन स्टैनली का अनुमान भारत की आर्थिक ताकत और नीतिगत निरंतरता को रेखांकित करता है, जो इसे वैश्विक विकास इंजन के रूप में स्थापित कर सकता है।