
नई दिल्ली में शुक्रवार को नई जीडीपी श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) जारी होने जा रही है। यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को और स्पष्ट करेगा, जिसमें जीएसटी डेटा का व्यापक उपयोग शामिल है। सांख्यिकी मंत्रालय की उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों में जीएसटी के अधिक इस्तेमाल की सिफारिश की है।
यह प्रक्रिया 2011-12 के पुराने आधार को अपडेट करने की है, जो डिजिटल व्यापार, सेवा क्षेत्र की वृद्धि और असंगठित अर्थव्यवस्था को बेहतर दर्शाएगा। ई-वाहनों के पंजीकरण और प्राकृतिक गैस खपत जैसे नए आंकड़े भी शामिल होंगे।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जिसमें घरेलू मांग प्रमुख भूमिका निभाएगी। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, 2026 के तीसरे तिमाही में 8-8.1 प्रतिशत विकास संभव है।
उच्च आवृत्ति वाले आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों की मजबूती दिखाते हैं। यूनियन बैंक का मानना है कि चालू तिमाही में 8.3 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। शुक्रवार को नए अनुमान और पुराने आंकड़ों के संशोधन सामने आएंगे।
यह नई श्रृंखला भारत को वैश्विक पटल पर अपनी चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी। घरेलू मजबूती वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बनी हुई है।