
भारत ने वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन कर दिखाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश का डिजिटल भुगतान तंत्र दुनिया के सबसे उन्नत सिस्टमों में शुमार हो गया है और अब यह अन्य विकासशील राष्ट्रों के लिए अनुकरणीय बन गया है।
अजरबैजान की न्यूज डॉट एजेड की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी नीतियों, तकनीकी प्रगति और व्यापक मोबाइल पहुंच के संयोजन ने भारत को यह ऊंचाई प्रदान की है। यह मॉडल दर्शाता है कि सीमित संसाधनों वाले देश भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
डिजिटल पहचान प्रणाली आधार ने वित्तीय सेवाओं की नींव रखी। सस्ते स्मार्टफोन और तेज इंटरनेट ने लाखों लोगों को डिजिटल भुगतान से जोड़ा। पीएम-वानी योजना के तहत फरवरी 2026 तक 4 लाख से अधिक वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित हो चुके हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट क्रांति ला रहे हैं।
यूपीआई ने नकदी की निर्भरता कम कर वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई है। जनवरी 2026 में 21.7 अरब लेन-देन के साथ 28.33 लाख करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। यह सुविधा शहरों से गांवों तक हर वर्ग तक पहुंची है।
विकासशील देशों के लिए भारत का अनुभव नीति निर्माण, बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास का पूर्ण पाठ्यक्रम प्रस्तुत करता है। यह साबित करता है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से बड़े बदलाव संभव हैं।