
मुंबई। जनवरी 2026 के अंत तक भारत में मुद्रा परिसंचरण रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह सालाना 11.1 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्शाता है, जो पिछले साल के 5.3 प्रतिशत से कहीं अधिक है। एसबीआई रिसर्च की सोमवार जारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनता के पास उपलब्ध मुद्रा कुल सर्कुलेशन का 97.6 प्रतिशत (लगभग 39 लाख करोड़ रुपये) है। दूसरी ओर, यूपीआई लेनदेन ने डिजिटल पेमेंट्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
एक माह में यूपीआई लेनदेन का मूल्य 28 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल मुद्रा स्टॉक का 70 प्रतिशत है। इससे कैश-टू-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 26 में घटकर 11 प्रतिशत रह गया, जो वर्ष 21 में 14.4 प्रतिशत था।
रिपोर्ट कहती है, “मुद्रा और जीडीपी वृद्धि एक दिशा में भले बढ़ रही हो, लेकिन वृद्धि का बड़ा हिस्सा अब यूपीआई से हो रहा है।”
सीआरआर में कटौती से आरबीआई में बैंकों के जमा 1.86 लाख करोड़ रुपये कम हुए, जिससे रिजर्व मनी वृद्धि 5.8 प्रतिशत पर सिमट गई।
वर्ष 2015 से 2025 के बीच बैंक जमा 85.3 लाख करोड़ से 241.5 लाख करोड़ और ऋण 67.4 लाख करोड़ से 191.2 लाख करोड़ हो गए। बैंक संपत्ति जीडीपी का 77 से 94 प्रतिशत हो गई, जो वित्तीय मजबूती दिखाती है।
यह डेटा भारत की संतुलित अर्थव्यवस्था को रेखांकित करता है, जहां डिजिटल और नकदी दोनों का सह-अस्तित्व विकास को गति दे रहा है।