
नई दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 17 अरब पैरामीटर वाले बहुभाषी एआई मॉडल ‘परम-2’ का धूमधाम से लॉन्च होगा। यह भारतजेन पहल का हिस्सा है, जो देश की भाषाई विविधता, प्रशासनिक आवश्यकताओं और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप तैयार किया गया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रायोजित यह राष्ट्रीय जनरेटिव एआई कार्यक्रम ने हाल के वर्षों में मजबूत नींव रखी है। अब भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जो स्वयं बड़े एआई मॉडल विकसित कर सकते हैं। ‘भारत डेटा सागर’ पर प्रशिक्षित परम-2 सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करता है और मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स संरचना पर आधारित है।
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन ने इसे शोधकर्ताओं, संस्थानों और उद्योग के संयुक्त प्रयास का प्रतीक बताया। चैटजीपीटी जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म से हटकर, यह मॉडल सार्वजनिक डिजिटल संपदा के रूप में उपलब्ध होगा।
सरकारी विभाग, बैंक, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान इसे ऑफलाइन सुरक्षित वातावरण में उपयोग कर सकेंगे, जिससे डेटा संप्रभुता सुनिश्चित होगी। राष्ट्रीय साइबर-फिजिकल सिस्टम्स मिशन के 235 करोड़ से शुरूआत कर अब इंडियाएआई मिशन के 900 करोड़ से मजबूती मिल रही है। यह कदम भारत के एआई भविष्य को नई दिशा देगा।