
नई दिल्ली। पिछले 15 वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक तूफानों का सामना करते हुए भी भारतीय शेयर बाजार ने अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट ने इस तथ्य को रेखांकित किया है।
एक्सिस एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट बताती है कि ऑपरेशन सिंदूर हो या 2011 की मध्य पूर्व अशांति, हर बार घरेलू सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज हुई। लेकिन ये झटके क्षणिक साबित हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, हर बड़े संघर्ष के बाद बाजार ने शानदार वापसी की। अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के बीच मिसाइल हमलों से वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया, लेकिन भारतीय निवेशकों को सब्र रखने की सलाह दी गई।
ऐसे संकट अल्पकालिक उतारचढ़ाव लाते हैं, जो क्षेत्रीय रहें तो लंबे समय तक नुकसान नहीं देते। बाजार की असली दिशा कंपनियों की कमाई, तरलता और आंतरिक मांग से तय होती है।
एक्सिस म्यूचुअल फंड के सीआईओ आशीष गुप्ता कहते हैं, ‘हर बड़ा संघर्ष निवेशकों का इम्तिहान लेता है, लेकिन बाजार हमेशा उभरकर सामने आया। गिरावट में खरीदें, विविधीकरण करें और लंबे समय तक टिकें।’
पहले घबड़ाकर बेचने वालों ने बाद की तेजी गंवा दी। आज का संकट गंभीर है, लेकिन नया नहीं। 15 सालों का इतिहास यही साबित करता है कि धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार है।