
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्ते नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने खुलासा किया है कि भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य क्षेत्रों में अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की तैयारी में हैं। यह घोषणा दोनों देशों के मजबूत साझेदारी का प्रतीक है।
एक्स प्लेटफॉर्म पर राजदूत ने बताया कि एक ही दिन में 12 भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 1.1 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की। इन निवेशों से नौकरियों का सृजन हो रहा है और दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन को और मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच व्यापार से सभी को फायदा होता है। यह बयान तब आया जब भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं।
हालांकि कंपनियों के नाम बताए नहीं गए, लेकिन यह निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गति देगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में भारत के साथ अमेरिकी व्यापार घाटा 3.8 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 7.4 अरब डॉलर से 48.64 प्रतिशत कम है। अमेरिका का भारत को निर्यात 4.3 अरब डॉलर और आयात 8.4 अरब डॉलर रहा।
कुल मिलाकर अमेरिकी व्यापार घाटा मार्च में 60.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया। भारतीय कंपनियों का यह कदम वैश्विक बाजार में उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। आने वाले समय में यह साझेदारी और गहरी होगी, जो दोनों देशों के लिए समृद्धि लाएगी।
