
नई दिल्ली में अमेरिकी टेक दिग्गजों के अरबों डॉलर के निवेश से भारत में एआई अपनाने की गति में जबरदस्त तेजी आने वाली है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियां यहां एआई हब स्थापित कर चुकी हैं, जो अमेरिकी तकनीक को भारत की अर्थव्यवस्था की नींव बनाने का प्रयास है।
यह साझेदारी वैश्विक डिजिटल भविष्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखेगी, जबकि चीन की तकनीक पर निर्भरता वैश्विक व्यवस्था को खंडित कर सकती है। अमेरिका के पास अत्याधुनिक कंप्यूटिंग में बढ़त है, लेकिन चीन की नवाचार क्षमता चुनौती बनी हुई है।
भारत सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि 1.5 अरब लोगों के डेटासेट का खजाना है, जो कृषि से स्वास्थ्य तक एआई परीक्षण के लिए आदर्श है। 2027 तक 1.25 मिलियन एआई विशेषज्ञ भारत को नवाचार का केंद्र बनाएंगे।
हालांकि, प्रतिभा को विशेष कार्यों के लिए तैयार करने की जरूरत है। अमेरिकी कंपनियों को भारतीय टैलेंट को अपनाना होगा ताकि राज्य नियंत्रण वाली तकनीकों पर बढ़त बनी रहे।
चार सूत्री रणनीति में स्टार्टअप जोड़ना, बुनियादी ढांचा बनाना, टैलेंट प्रवाह सुगम करना और नीतियां संरेखित करना शामिल है। यह साझा मूल्यों को मजबूत सहयोग में बदल देगा।
