
भारतीय डाक विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआती तीन तिमाहियों में अपनी आय में शानदार 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कुल राजस्व 10,211 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 9,385 करोड़ से कहीं अधिक है। विभाग ने आय वृद्धि, दक्षता सुधार और नेटवर्क विस्तार के लिए विस्तृत रोडमैप भी पेश किया।
पार्सल क्षेत्र में 12.3 प्रतिशत की तेज रफ्तार देखी गई, जो उत्पाद पुनर्गठन, लॉजिस्टिक्स मजबूती और ई-कॉमर्स केंद्रों पर विशेष ध्यान से संभव हुई। स्पीड पोस्ट पार्सल की 24 घंटे डिलीवरी पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे छह बड़े शहरों में 95 प्रतिशत से ज्यादा सफल रही।
कोर सिटिजन सर्विसेज में आय दोगुनी से अधिक हो गई, जिसमें आधार केंद्र, पासपोर्ट सेवाएं, केवाईसी और टेलीकॉम साझेदारी मुख्य रही। पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस ने 15 प्रतिशत विकास के साथ बाजार से आगे निकल लिया, 1.24 करोड़ पॉलिसी और 2.27 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ।
डाक निर्यात केंद्रों की संख्या 1000 से ऊपर पहुंची, जिन्होंने 13 लाख पार्सल भेजे और 135 देशों में 303 करोड़ का निर्यात किया। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के लिए पायलट प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स साझेदारी से वैश्विक क्षमता बढ़ी।
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक में डिजिटल化 तेज, 37.36 करोड़ खाते आधार-यूपीआई से जुड़े, जमा 21.77 लाख करोड़। आईपीपीबी के 12.91 करोड़ खाते और 3.80 करोड़ सुकन्या खाते। 2028-29 तक बीमा के 70 प्रतिशत ऑनलाइन लेन-देन का लक्ष्य।
डाकघरों का पुनर्गठन, हब विलय और मेल एकीकरण से दक्षता बढ़ी। मार्च 2026 तक 100 डाकघर ‘एन-जेन’ होंगे, 46 संस्थानों से साझेदारी। ये कदम इंडिया पोस्ट को मजबूत वित्तीय और लॉजिस्टिक्स प्रदाता बनाएंगे।