
नई दिल्ली में विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 की तैयारियों के दौरान एक महत्वपूर्ण आयोजन हुआ, जहां विशेषज्ञों ने होम्योपैथी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूत करने पर विचार-विकिमर्श किया। आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ने सतत और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं में होम्योपैथी की भूमिका को रेखांकित किया।
आयुष के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, शोधकर्ता और प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए। संयुक्त सचिव अलारमेलमंगई डी ने होम्योपैथी को व्यापक ढांचे में एकीकृत करने की सरकारी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें सुलभ और रोगी-केंद्रित प्रणाली पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को सम्मानित किया गया। लगभग 90 छात्रों ने फोटो सेशन के जरिए भावी चिकित्सकों का स्वागत किया। ‘स्थायी स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी’ थीम और ‘अनंत संभावनाएं’ विजन के तहत यह आयोजन परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम बना।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी ने मस्तिष्क ट्यूमर, ऑटोइम्यून रोगों और एंडोमेट्रियोसिस पर साक्ष्य-आधारित केस दिखाए। सत्रों में बाल होम्योपैथी, कैसिया फिस्टुला जैसी नई दवाओं और कृषि होम्योपैथी पर चर्चा हुई।
फेफड़े, कैंसर और न्यूरो विशेषज्ञों ने एकीकृत देखभाल पर जोर दिया। डब्ल्यूएचओ रणनीति के अनुरूप वैश्विक अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण किया गया। पशु चिकित्सा में भी होम्योपैथी का विस्तार दिखा।
आयुष और सीसीआरएच के नेतृत्व में अनुसंधान प्राथमिकताओं की रूपरेखा बनी, जो होम्योपैथी को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

