
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के बीच जारी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक वैश्विक बाजार में मजबूत बने रहने के लिए भारत को व्यापार में अधिक खुलापन अपनाना होगा और आवश्यक सुधारों को गति देनी होगी।
सिस्टमैटिक्स की इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि उल्टे ड्यूटी ढांचे को सुधारना, लॉजिस्टिक्स व कस्टम्स प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कच्चे माल की लागत घटाना, असेंबली आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देकर बड़े स्तर पर उत्पादन व रोजगार सृजन करना जरूरी है। साथ ही संरक्षणवादी नीतियों को कम करना, मुक्त व्यापार समझौतों की संख्या बढ़ाना, अनुसंधान एवं विकास पर निवेश मजबूत करना तथा भूमि, श्रम व कौशल संबंधी बाधाओं को दूर करना अपरिहार्य है।
ये कदम मिलकर भारत को उन्नत विनिर्माण की ओर ले जाएंगे, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से गहरा जुड़ाव सुनिश्चित करेंगे और कठोर व्यापार नीतियों के जोखिमों को न्यून करेंगे। इससे देश की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धी क्षमता में इजाफा होगा।
7 फरवरी 2026 को हुए द्विपक्षीय समझौते में दोनों देशों के लिए समान बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है। भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, डीडीजीएस, लाल ज्वार, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, शराब आदि पर टैरिफ कम करने या समाप्त करने पर सहमति जताई है।
बदले में अमेरिका ने भारतीय कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक, रसायन व मशीनरी पर 18 प्रतिशत शुल्क लगाया है। समझौते के सफल कार्यान्वयन पर जेनेरिक दवाओं, रत्न-आभूषण व विमान पुर्जों पर शुल्क हटाने का प्रावधान है।
अमेरिका का उद्देश्य व्यापार संतुलन कायम रखना है, जबकि भारत को टैरिफ राहत मिलेगी जिससे उसके उत्पादों पर अमेरिकी शुल्क 18 प्रतिशत तक सीमित हो जाएगा। वाणिज्य मंत्री के मुताबिक, इससे रोजगारोन्मुखी क्षेत्र, मेक इन इंडिया व आत्मनिर्भर भारत को बल मिलेगा।
विमान व पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित शुल्क हटेंगे, ऑटो पार्ट्स को विशेष कोटा मिलेगा। इससे एविएशन व विनिर्माण क्षेत्रों को अपार वृद्धि के अवसर प्राप्त होंगे।