
नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पूरी तरह शामिल कर लिया है। इसका मुख्य लक्ष्य चिकित्सकों की कमी को पूरा करना और आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाला इलाज उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्री닝 और बीमारी निगरानी प्रणाली में एआई उपकरणों का सफल प्रयोग हो रहा है। इससे सामान्य स्वास्थ्यकर्मी भी जटिल जांच कर पा रहे हैं। नतीजा यह कि गंभीर टीबी मामलों में 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और 4500 से अधिक समय पर अलर्ट जारी हो चुके हैं।
ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म ने 28.2 करोड़ से ज्यादा परामर्श दिए हैं, जहां एआई बीमारी पहचान में सहायक सिद्ध हो रहा है। कुपोषण ट्रैकिंग के लिए भी एआई सिस्टम सक्रिय हैं। अब यह पहल संक्रामक रोगों से आगे बढ़कर कैंसर उपचार, आयुर्वेद के आधुनिकीकरण और वन हेल्थ कार्यक्रम तक पहुंच चुकी है।
16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ का पहला अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें वैश्विक नेता, नीति विशेषज्ञ और टेक कंपनियां एआई नीतियों, शोध और जन भागीदारी पर विचार मंथन करेंगे।
मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में मंत्रिमंडल ने इंडियाएआई मिशन को हरी झंडी दी, जिसके लिए 10,371.92 करोड़ का प्रावधान है। इसकी एआई एप्लीकेशन पहल देश की चुनौतियों का समाधान दे रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती, सटीक और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहीं हैं।