
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते ने भारतीय दवा उद्योग के लिए ऐतिहासिक अवसर खोले हैं। इस एफटीए से यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के विशाल दवा एवं चिकित्सा उपकरण बाजार तक भारतीय कंपनियों को सीधी पहुंच मिल गई है। सरकार का मानना है कि इससे उद्योग को अभूतपूर्व बल मिलेगा, जिससे कारोबार विस्तार, रोजगार सृजन और वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता दवा कंपनियों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। कुशल नौकरियां बढ़ेंगी, औद्योगिक क्षेत्र फलेगा-फूलेगा और छोटे-मध्यम उद्यमों की भूमिका वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ेगी। भारत ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान को और पुख्ता करेगा।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह एफटीए दवा एवं मेडटेक क्षेत्र के लिए सुनहरा मौका है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यूरोप के विशाल बाजार तक पहुंच और भारतीय उपकरणों पर कम शुल्क से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेज रफ्तार आएगी।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वास्थ्य एवं विनिर्माण में वैश्विक साझेदार बन रहा है।
आधुनिक नियमों पर आधारित यह समझौता वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए दोनों अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता, रसायन-दवा क्षेत्रों में उछाल और एमएसएमई क्लस्टरों का विकास होगा। गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्य समुद्री निर्यात केंद्रों से लाभान्वित होंगे, जिससे रोजगार और प्रोसेसिंग उद्योग मजबूत होंगे।
कुल मिलाकर, भारत-ईयू एफटीए साझा मूल्यों को मजबूत कर नवाचार को प्रोत्साहित करता है तथा समावेशी विकास की मजबूत नींव रखता है।