
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी की भारी वापसी हुई है। फरवरी 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 17 महीनों में सबसे बड़ा निवेश किया, जिसमें 2.44 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी दर्ज हुई। यह सितंबर 2024 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है, जो बाजार में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।
बुधवार को जारी एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, FII ने सेकेंडरी मार्केट में 2.14 अरब डॉलर और प्राइमरी मार्केट में 299 मिलियन डॉलर लगाए। अक्टूबर 2023 से प्राइमरी में खरीदारी जारी रही, लेकिन जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक सेकेंडरी से 46 अरब डॉलर से अधिक की निकासी हो चुकी थी। महीने की शुरुआत में आईटी शेयरों में 1.21 अरब डॉलर की बिकवाली के बावजूद यह उछाल आया।
विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह निवेश पिछले बिकवाली के मुकाबले छोटा है और स्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि अस्थायी राहत हो सकती है। आईटी क्षेत्र में दबाव बरकरार रहा तो निकासी फिर तेज हो सकती है। हालांकि, बाजार के मूल्यांकन अब संतुलित हैं, जिससे भारी बिकवाली की आशंका कम है।
पिछले महीने सेंसेक्स 1.08 प्रतिशत, निफ्टी 2.05 प्रतिशत चढ़ा। मिडकैप 100 में 4.72 प्रतिशत और स्मॉलकैप 250 में 5.10 प्रतिशत की तेजी आई। एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में सुधार के संकेत दिख रहे हैं और अगले 12 महीनों में निफ्टी 27,958 तक पहुंच सकता है।
नीतिगत स्पष्टता, बड़े व्यापारिक समझौते और बुनियादी ढांचे पर फोकस भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता विकास के अगले चक्र का प्रमुख उत्प्रेरक बनेगा। बैंकिंग क्षेत्र को 13-14 प्रतिशत क्रेडिट वृद्धि और मजबूत एसेट क्वालिटी से फायदा होगा, जबकि कैपिटल गुड्स कंपनियां इंफ्रा-रक्षा निवेश से मजबूत होंगी।
FII की यह वापसी बाजार के लिए सकारात्मक है, लेकिन लंबे समय की दिशा तय करने में अभी वक्त लगेगा।