
नई दिल्ली। अरबपति निवेशक मार्क मोबियस ने खुलासा किया है कि भारत के यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौते ने अमेरिका को भारत के साथ अपने सौदे को जल्द पूरा करने के लिए मजबूर किया। बुधवार को दिए बयान में उन्होंने कहा कि यह डील अमेरिकी पक्ष को गति प्रदान करने वाली प्रमुख वजह बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गहरी दोस्ती ने प्रक्रिया को सरल बनाया, लेकिन मोबियस ने जोर देकर कहा कि वास्तविक समझौता दोनों देशों के वार्ताकारों की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने ‘सभी व्यापार सौदों का पिता’ जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण नामों को खारिज कर दिया।
मोबियस के अनुसार, ईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत का इस दिशा में स्वतंत्र कदम उसकी रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है, जिसने अमेरिका को अपने समझौते को अंतिम रूप देने में तेजी लाने को विवश किया।
भारत की अर्थव्यवस्था पर उनका विश्वास अटल है। वे मानते हैं कि देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, जो अन्य उभरते देशों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा। युवा आबादी और तेज शहरीकरण विशाल उपभोक्ता बाजार तैयार कर रहे हैं, जबकि निर्यात वृद्धि अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे रही।
शेयर बाजार पर बात करते हुए मोबियस ने कहा कि सेंसेक्स का 1 लाख का आंकड़ा पार करना इस साल मुश्किल है, क्योंकि इसके लिए 20 प्रतिशत की चढ़ाई जरूरी होगी। फिर भी, वे भारत के मूलभूत कारकों पर भरोसा जताते हैं। ये तत्व आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर सुनिश्चित करेंगे।