
नई दिल्ली, 15 फरवरी। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क के कंसोर्टियम आधारित नवाचार मॉडल की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल तकनीक के त्वरित व्यावसायीकरण में सहायक सिद्ध हो रहा है और अब देश के अन्य शैक्षणिक संस्थान इसे अपना रहे हैं।
आईटीईएल फाउंडेशन और उन्नत अनुसंधान सुविधाओं के दौरे के दौरान डॉ. सिंह ने शहरी गतिशीलता, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, चिकित्सा उपकरण तथा मस्तिष्क अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में चल रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। उन्होंने कंसोर्टियम दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि उद्योग भागीदारों का प्रारंभिक चरण से जुड़ाव नवाचारों को वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ता है।
यह एकीकृत प्रक्रिया अनुसंधान परिणामों को शीघ्र ही व्यावहारिक समाधानों में बदल देती है। जुलाई 2024 में गठित आईटीईएल फाउंडेशन, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है, भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता बनाने का लक्ष्य रखता है।
दौरे में हैश्टिक मोबिलिटी पहल का प्रदर्शन प्रमुख रहा, जिसमें मौजूदा सड़कों पर ऊपरी ट्रैक पर एआई-सक्षम छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों से 15 किमी यात्रा को 20 मिनट में पूरा करने का प्रस्ताव है। डॉ. सिंह ने अग्निकुल कोसमॉस स्टार्टअप का भी जायजा लिया, जो लचीले सैटेलाइट लॉन्च विकसित कर रहा है।
आईएसआरओ और इन-स्पेस के सहयोग से मई 2024 में अपना पहला मिशन सफल करने के बाद यह कंपनी पुन:उपयोगीय रॉकेट के व्यावसायिक प्रक्षेपण की तैयारी में है। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की उभरती भूमिका को दर्शाता है।
डॉ. सिंह की यह प्रशंसा सहयोगी नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।