
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) का दबदबा बढ़ता जा रहा है। निफ्टी 500 में उनकी हिस्सेदारी अब 20.6 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो 2021 के बाद से लगातार ऊंचाई बना रही है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट ने इस बदलाव को रेखांकित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में डीआईआई ने 23.4 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि पूरे साल यह 90.1 अरब डॉलर रहा। इसने न केवल एफआईआई की 18.8 अरब डॉलर की बिकवाली को कवर किया, बल्कि आईपीओ-एफपीओ से जुटाए गए 1.95 लाख करोड़ रुपये को भी समर्थन दिया।
निफ्टी 500 में डीआईआई की हिस्सेदारी सालाना 2.10 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 0.60 प्रतिशत बढ़ी। एफआईआई की 18.4 प्रतिशत रह गई, जिसमें सालाना 0.50 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी 50 में डीआईआई के पास 24.8 प्रतिशत और एफआईआई के पास 24.3 प्रतिशत हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचनात्मक बदलाव है। 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपये की एसआईपी, पेंशन फंड्स और नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने घरेलू निवेश को बल दिया। बाजार अब वैश्विक उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होगा।