
नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण व्याख्यान में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से फैलते प्रभाव पर चिंता जताई, जो गरीब वर्ग के प्रति गहरे अंतर्निहित पूर्वाग्रह प्रदर्शित कर रहा है। ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ द्वारा संचालित आठवें दिनकर स्मृति व्याख्यान में ‘रश्मिरथी: सामाजिक न्याय का महाकाव्य’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय किसी भी मानवीय समाज की मजबूत नींव है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के महाकाव्य रश्मिरथी का हवाला देते हुए सीजेआई ने उल्लेख किया कि समानता और गरिमा के सिद्धांत संविधान से पहले ही उनकी रचनाओं में जीवंत हो चुके थे। लोकतंत्र में ये मूल्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना आवश्यक है।
समाज की जड़ों में बसी असमानताओं पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि सात दशकों के बाद भी दिनकर द्वारा चित्रित विषमताएं आज भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने आगाह किया कि एआई जैसी नई तकनीकें यदि संवैधानिक मूल्यों और मानवीय करुणा से निर्देशित न हों, तो सामाजिक अलगाव को और बढ़ावा देंगी।
सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना ही न्यायपूर्ण व्यवस्था की कुंजी है। साहित्य और संवैधानिक नैतिकता का संयोजन समाज में समानता व सद्भाव का स्थायी आधार तैयार करता है।
इस मौके पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी को दिनकर की विरासत को मजबूत करने के लिए ‘दिनकर संस्कृति सम्मान 2026’ से नवाजा गया। तिवारी ने कहा कि दिनकर की कविताएं हमारी सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक हैं।
व्याख्यान में न्यायपालिका, शिक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने दिनकर के लेखन को भारतीय सभ्यता की न्याय परंपरा से जोड़ा। ‘रिस्पेक्ट इंडिया’ के मनीष कुमार चौधरी ने इसे दिनकर की चिरस्थायी विरासत को समर्पित बताया।
