
चीन की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच एक गंभीर समस्या उजागर हुई है। देशभर में फर्जी मनोरोग अस्पतालों का जाल बिछा है, जो सरकारी स्वास्थ्य बीमा को लूटने के लिए मरीजों को झूठे आधार पर भर्ती कर रहे हैं। एक मीडिया जांच के अनुसार, शियांगयांग और यिचांग जैसे शहरों में दर्जनों ऐसी सुविधाएं पाई गईं, जो कम या मुफ्त इलाज का लालच देकर लोगों को फंसाती हैं।
चीन की मेडिकल इंश्योरेंस व्यवस्था में मरीजों को इलाज का सीमित हिस्सा भरना पड़ता है, बाकी सरकार वहन करती है। इन फर्जी अस्पतालों में प्रतिदिन प्रति मरीज 140 युआन का बिल बनाया जाता है, जिसका ज्यादातर हिस्सा बीमा क्लेम से वसूला जाता है। कुछ जगहों पर मरीजों की संख्या नाममात्र थी, तो कहीं 100 से अधिक। ज्यादातर बुजुर्ग और शराबी थे, जो मुफ्त भोजन व ठहरने के नाम पर फंस गए।
अस्पतालों की दशा खराब थी। गुप्त जांच में शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना, जबरन सफाई, नहलाने जैसे काम सामने आए। भर्ती के बाद छुट्टी मिलना मुश्किल, कई सालों तक कैद जैसे हालात।
यह घोटाला चीन की बुजुर्ग देखभाल प्रणाली की कमजोरियों को बेनकाब करता है। पारंपरिक रूप से परिवार पर निर्भर यह सिस्टम अब टूट रहा है। गांव खाली हो रहे हैं, युवा शहरों में नौकरी के लिए चले जाते हैं। ग्रामीण पेंशन कमजोर, सेवाएं अपर्याप्त—बुजुर्ग अकेले पड़ रहे हैं।
2025 तक 4 करोड़ से अधिक वृद्ध आबादी के साथ, सरकार को पेंशन मजबूत करने, ग्रामीण सेवाएं बढ़ाने और वास्तविक देखभाल केंद्र बनाने होंगे। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन व्यापक सुधार जरूरी हैं वरना संकट गहराएगा।