
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्बन कैप्चर तकनीक को भारत के इस्पात क्षेत्र में नई क्रांति की शक्ति बताया है। 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में यह तकनीक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चे इस्पात उत्पादक देश है, जिसने वित्त वर्ष 2024-25 में 152 मिलियन टन उत्पादन किया। 2030-31 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन का लक्ष्य है। लेकिन कोयला आधारित उत्पादन से 10-12 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है, जो चुनौती है।
इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के लेख का हवाला देते हुए पीएम ने ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी का जिक्र किया, जिसमें कम उत्सर्जन वाले इस्पात को 3-5 स्टार रेटिंग मिलेगी। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 455 करोड़ रुपये स्टील मंत्रालय को दिए गए हैं।
इस वर्ष के बजट में 20,000 करोड़ रुपये कार्बन कैप्चर के पायलट प्रोजेक्ट के लिए हैं, जिसमें स्टील शामिल है। सीसीयूएस तकनीक से कारखानों से निकलने वाली सीओ2 को पकड़कर प्रदूषण रोका जा सकेगा, पुराने प्लांट भी चलते रहेंगे।
यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को मजबूत करेंगे। विकसित भारत का सपना साकार करने में स्टील क्षेत्र की भूमिका अहम होगी।