
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी प्रदान कर दी। इस योजना पर कुल 37,500 करोड़ रुपये का व्यय निर्धारित किया गया है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
योजना से कोयला उत्पादक इलाकों में 25 परियोजनाओं के जरिए करीब 50,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। गैर-नियंत्रित क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीलामी में सिंथेटिक गैस उत्पादन के लिए कोयला लिंकेज अवधि को 30 वर्ष तक बढ़ाया गया है, जिससे निवेशकों को लंबी अवधि की नीतिगत गारंटी मिलेगी।
यह योजना 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगी। इससे एलएनजी (50% से अधिक आयात), यूरिया (20% आयात), अमोनिया (पूर्ण आयात) और मेथनॉल (80-90% आयात) जैसे उत्पादों पर निर्भरता घटीगी। लगभग 7 करोड़ टन कोयला-लिग्नाइट के गैसीकरण का लक्ष्य रखते हुए नई परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
योजना में संयंत्र-मशीनरी लागत का 20% तक वित्तीय सहायता, पारदर्शी बोली प्रक्रिया, बेंचमार्क आधारित मूल्यांकन और चार किस्तों में प्रोत्साहन वितरण जैसी सुविधाएं शामिल हैं। प्रति परियोजना अधिकतम 5,000 करोड़, प्रति उत्पाद 9,000 करोड़ (एसएनजी-यूरिया छोड़कर) और समूह के लिए 12,000 करोड़ की सीमा है।
75 मिलियन टन गैसीकरण से सालाना 6,300 करोड़ रुपये की कोयला आय और कर राजस्व की उम्मीद है। भारत के पास 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट भंडार हैं, जो ऊर्जा मिश्रण का 55% हिस्सा बनाते हैं। वित्त वर्ष 2025 में प्रतिस्थापन उत्पादों पर 2.77 लाख करोड़ का आयात बिल बना। यह योजना आत्मनिर्भर ऊर्जा यात्रा को नई गति देगी।
