
नई दिल्ली में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र, महत्वपूर्ण खनिजों, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, बुनियादी ढांचे और सस्ते घरों पर खास नजर रहेगी। वित्तीय विशेषज्ञों की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में नीतिनिर्माता विकास लक्ष्यों और राजकोषीय संयम के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन कायम रखेंगे।
रिपोर्ट बताती है कि भले ही बजट में कोई बड़ा धमाका न हो, लेकिन चुनिंदा क्षेत्रों में सकारात्मक कदम शेयर बाजार को उत्साहित कर सकते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार को आर्थिक प्रगति को गति देने के साथ-साथ घाटे पर अंकुश लगाना होगा, खासकर वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच।
निवेशकों की अपेक्षाएं सीमित हैं। वे बड़े बदलावों की कल्पना नहीं कर रहे। वित्त मंत्री के समक्ष कई मोर्चे हैं, इसलिए कोई सुखद फैसला बाजार को सरप्राइज दे सकता है। पिछले वर्षों में बजट का बाजार पर प्रभाव कम हुआ है, क्योंकि सरकार साल भर नीतिगत फैसले लेती रहती है। अब फोकस उन कदमों पर है जो चुनिंदा क्षेत्रों को बढ़ावा दें।
वित्तीय अनुशासन की दिशा सराहनीय है। कोविड काल के 9.2 प्रतिशत घाटे से अब 2026 के अंत तक 4.4 प्रतिशत तक गिरावट की उम्मीद। खर्च नियंत्रित रहेंगे, हालांकि 2027 के लिए नया कर्ज लक्ष्य और कमजोर उपभोग से थोड़ा अतिरिक्त व्यय संभव।
यदि अतिरिक्त खर्च उत्पादक निवेश या खपत बढ़ाने पर केंद्रित रहा, तो शेयर बाजार इसका स्वागत करेगा। FY26 में मध्यम वर्ग को एक लाख करोड़ की टैक्स राहत दी गई थी, जिसका असर बाकी है, इसलिए आगे सीमित कदम ही उठाए जाएंगे।
बजट पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देगा, विशेषकर रणनीतिक क्षेत्रों में जो वैश्विक परिदृश्य में महत्वपूर्ण हैं। यह भारत की मजबूती सुनिश्चित करेगा।