
अंटार्कटिका के क्वीन मौड लैंड में ग्रुबर पर्वतों के पास अनुचिन ग्लेशियर के किनारे बसी अन्टर-सी झील धरती की सबसे रहस्यमयी जलस्रोतों में शुमार है। मोटी बर्फ की चादर वर्ष भर इसे ढके रहती है, जहां तापमान औसतन शून्य से 10 डिग्री नीचे रहता है। यह जगह जीवन की सीमाओं को चुनौती देती है।
नासा के लैंडसैट-9 उपग्रह ने 16 फरवरी 2026 को गर्मियों में इस झील की मनमोहक तस्वीर ली, जिसमें बर्फीले पानी और ठंडे इलाके की झलक मिलती है। अनुचिन ग्लेशियर के पिघलाव से पानी आता है, सूरज की किरणें बर्फ पार कर गहराई को हल्का गर्म करती हैं, मगर तेज हवाएं वाष्पीकरण तेज कर देती हैं।
558 फीट गहरी यह झील ऑक्सीजन से भरपूर, कार्बन डाइऑक्साइड कम और क्षारीय है। यहां विशालकाय शंक्वाकार स्ट्रोमेटोलाइट्स पनपते हैं, जो साइनोबैक्टीरिया द्वारा बनाए जाते हैं। ये चिपचिपे मैट पर तलछट फंसाकर कैल्शियम कार्बोनेट की परतें बनाते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं।
2011 में एसईटीआई के डेल एंडरसन ने इन्हें खोजा, जो आधा मीटर ऊंचे हैं—झील जॉयस के मुकाबले कहीं बड़े। बर्फ की सुरक्षा, साफ पानी, कम तलछट और हल्की रोशनी से ये इतने विशाल बने। टार्डिग्रेड्स यहां के सबसे बड़े जीव हैं।
ये स्ट्रोमेटोलाइट्स 3 अरब साल पुराने सूक्ष्मजीवी जीवन की याद दिलाते हैं, ग्रीनलैंड व ऑस्ट्रेलिया के जीवाश्मों जैसे। एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इन्हें यूरोपा, एन्सेलाडस या मंगल के लिए मॉडल मानते हैं।
2019 में ओबर-सी झील फटने से 1.75 करोड़ घन मीटर पानी आया, जिससे पीएच बदला, सीओ2 बढ़ा और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हुई। वैज्ञानिक ऐसी बाढ़ों से पारिस्थितिकी को खतरा बताते हैं।