
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हेल्थकेयर क्षेत्र के लिए एसएएचआई रणनीति जारी की। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्रांतिकारी क्षमता तभी साकार हो सकती है जब इसे भरोसे, नैतिकता और समावेशिता के मजबूत स्तंभों पर खड़ा किया जाए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निदान संबंधी खाई, एल्गोरिदम में अंतर्निहित पक्षपात और सभी वर्गों तक समान सेवाओं की पहुंच जैसे मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं। एसएएचआई इन चुनौतियों का सामना करने के लिए स्पष्ट नीतियां, विविधतापूर्ण उच्च गुणवत्ता वाले डेटा और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एआई प्रशिक्षण पर जोर देती है।
‘एआई फॉर ऑल’ की अवधारणा के तहत यह रणनीति हर मरीज के लिए प्रभावी एआई इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखती है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र, आर्थिक स्थिति, भाषा या स्थान से हों। समिट में हुई बहसों ने स्वास्थ्य डेटा की विविधता, जवाबदेह एआई प्रणालियों और सार्वजनिक हित पर केंद्रित उपयोग की महत्ता रेखांकित की।
समिट का एक प्रमुख आकर्षण बीओडीएच प्लेटफॉर्म का लोकार्पण रहा, जिसे आईआईटी कानपुर और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह मंच स्वास्थ्य एआई समाधानों की व्यापक तैनाती से पूर्व उनकी जांच और विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा।
डॉक्टरों के लिए एआई उपकरण सुरक्षित, भरोसेमंद और वास्तविक परिस्थितियों में परखे गए होंगे। एसएएचआई और बीओडीएच जैसे कदम भारत को जिम्मेदार एआई अपनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं, जहां नवाचार चिकित्सा आवश्यकताओं, नियामक मानदंडों, समानता और जन विश्वास के अनुरूप होगा। यह स्वास्थ्य प्रणाली को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा।