
भारती एयरटेल ने वित्तीय क्षेत्र में अपनी मजबूत पैठ बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने सोमवार को घोषणा की कि वह अपनी एनबीएफसी इकाई एयरटेल मनी लिमिटेड के माध्यम से अगले कुछ वर्षों में डिजिटल लेंडिंग कारोबार बढ़ाने को 20,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी।
यह निवेश भारत के तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय सेवा बाजार में एयरटेल की स्थिति को और मजबूत करेगा तथा देश में मौजूद क्रेडिट की कमी को पाटने में सहायक होगा। कुल राशि में से 70 प्रतिशत एयरटेल खुद लगाएगी, जबकि 30 प्रतिशत प्रमोटर समूह भारती एंटरप्राइजेज से आएगी।
एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि उनका लेंडिंग प्लेटफॉर्म तकनीक, डेटा और ग्राहक विश्वास को प्रभावी ढंग से जोड़ने में सफल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि एनबीएफसी विस्तार इस आधार को सशक्त बनाएगा और भरोसे, नवाचार व वित्तीय समावेशन पर केंद्रित डिजिटल लेंडिंग का भविष्य गढ़ेगा।
13 फरवरी 2026 को आरबीआई से एनबीएफसी लाइसेंस मिलने के बाद यह कदम वित्तीय सेवाओं को गहराई प्रदान करने की दिशा में रणनीतिक है। कंपनी सरल, सुरक्षित व नवीन डिजिटल सेवाएं देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाएगी।
पिछले दो सालों में एयरटेल ने 9,000 करोड़ से अधिक के लोन वितरित किए हैं। एलएसपी मॉडल ने अनुशासित अंडरराइटिंग, बेहतर पोर्टफोलियो प्रबंधन व रीयल-टाइम रिस्क मॉनिटरिंग से शानदार वृद्धि हासिल की। 500 से ज्यादा डेटा वैज्ञानिकों का सपोर्ट वाला प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ा है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि आरबीआई पंजीकरण है, लेकिन वित्तीय स्थिति या देनदारियों की गारंटी नहीं। यह निवेश एयरटेल को टेलीकॉम से आगे वित्तीय क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है।