
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृषि क्रांति के नए द्वार खुल रहे हैं। राजमाता विजया राजे सिंधिया विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एरोपोनिक्स लैब में मिट्टी के बिना हवा में आलू उगाए जा रहे हैं। यहां 20 विभिन्न किस्मों के बीज तैयार हो रहे हैं, जो पूरी तरह स्वस्थ, शुद्ध और रोगमुक्त हैं। यह तकनीक खेती को नई दिशा देगी।
विभाग की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा तिवारी ने बताया कि प्रक्रिया टिशू कल्चर से शुरू होती है। पौधे मजबूत होने पर एरोपोनिक्स यूनिट में स्थानांतरित किए जाते हैं। जड़ें हवा में लटकती हैं, रूट टिप काटकर फॉगिंग से पोषक तत्व दिए जाते हैं। हर तीन मिनट में 30 सेकंड की फॉगिंग न्यूट्रिएंट्स पहुंचाती है। तापमान नियंत्रित रखा जाता है।
कुछ दिनों में जड़ें विकसित हो जाती हैं और 45-55 दिनों में हवा में आलू तैयार। यूनिट ऊपर उठाने पर साफ दिखते हैं। इन बीजों की खासियत रोगमुक्ति और उच्च गुणवत्ता है। अभी महंगे होने से किसानों तक नहीं पहुंचे, लैब टेस्टिंग जारी।
20 किस्मों में लाभकारी लाल आलू, चिप्स-फ्रेंच फ्राइज वाली और गुलाबी खाने वाली शामिल। रिसर्च किसानों के लिए सर्वश्रेष्ठ ढूंढ रही। दो साल फील्ड ट्रायल के बाद वितरण होगा। यह तकनीक रोग कम कर उत्पादकता बढ़ाएगी।