
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भविष्य प्रचार-प्रसार से आगे बढ़कर लोगों के जीवन को सरल बनाने वाले व्यावहारिक उपायों पर टिका है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन ‘एल्गोरिदम से परिणाम तक: लोगों के लिए एआई निर्माण’ सत्र में बोलते हुए, कृष्णन ने बताया कि भारत एआई मिशन विविध जरूरतों और वास्तविक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
पैनल चर्चा में उन्होंने कहा, ‘हम कम्प्यूटिंग, मॉडल और डेटा उपलब्ध करा रहे हैं ताकि वास्तविक प्रभाव वाले ऐप्लिकेशन बनें। प्रदर्शनी में स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और विनिर्माण में सैकड़ों स्टार्टअप दिखेंगे। यहीं से असली बदलाव आएगा।’
उन्होंने उल्लेख किया कि सरकारों के पास कभी पर्याप्त शिक्षक, चिकित्सक या न्यायाधीश नहीं हो सकते। ‘लेकिन एआई यदि उत्पादकता बढ़ाएगा, तो सेवाओं की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार संभव है।’
कृष्णन ने चुनौतियों पर प्रकाश डाला—प्रभावी उपाय चुनना, जिम्मेदारी से लागू करना, गोपनीयता सुरक्षित रखना और सार्वजनिक धन से मापने लायक नतीजे सुनिश्चित करना।
सत्र में जन-केंद्रित एआई और स्वदेशी तकनीकी क्षमता पर गहन विमर्श हुआ। इसका उद्देश्य एआई को सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक कल्याण में ठोस योगदान देने वाला बनाना था।
चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि संसाधनों का उपयोग उत्पादकता बढ़ाने, शासन मजबूत करने और नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने में कैसे हो।