
नई दिल्ली में सोमवार से शुरू हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने विश्व भर के नेताओं को एक मंच पर ला खड़ा किया है। नीति आयोग की फ्रंटियर टेक हब की चीफ आर्किटेक्ट देबजानी घोष ने विशेष बातचीत में कहा कि ग्लोबल साउथ का पहला वैश्विक एआई सम्मेलन भारत में होना गर्व का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने जानबूझकर ‘इम्पैक्ट’ पर फोकस किया है।
केवल एआई बुनियादी ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं, इसे लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। समिट के तीन स्तंभ हैं- लोग, पृथ्वी और समृद्धि। भारत की तकनीकी यात्रा हमेशा जमीनी स्तर से शुरू हुई है, चाहे डीपीआई हो या एआई, जो अंतिम महिला तक लाभ पहुंचाती है।
महिलाओं को न सिर्फ उपभोक्ता बनाया जा रहा, बल्कि उद्यमी और डेवलपर के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। समिट में साची चोपड़ा ने 200 से अधिक एआई प्रभाव कहानियों वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिक्र किया। राजस्थान के टोंक में ‘पहेल’ प्लेटफॉर्म ने छह सप्ताह में कक्षा 10वीं गणित पास प्रतिशत को लगभग दोगुना कर दिया।
हर कहानी में समस्या से समाधान, फंडिंग, नीति और प्रभाव का पूरा विवरण है। ‘बिल्ड योर ओन’ सुविधा प्रतिकृति के लिए रोडमैप देती है। इन-हाउस एआई असिस्टेंट कृषि-शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए सुझाव देता है।
डब्ल्यूईपी की अन्ना रॉय ने कहा कि समिट भारत को एआई में वैश्विक नेता बनाएगा। ‘एआई फॉर ऑल’, ‘युवा एआई’ और ‘एआई बाय हर’ चुनौतियां शुरू हुईं। 500 में से 63 फाइनलिस्ट, 30 विजेता, टॉप 10 को 25 लाख रुपये। कार्यशालाओं से जमीनी अपनापन बढ़ेगा।
यह समिट एआई को वास्तविक बदलाव का माध्यम बनाएगा।