
नई दिल्ली। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दावा आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में किया। उन्होंने कहा कि एआई शासन, विकास और जनकल्याणकारी उपयोग पर वैश्विक चर्चाओं में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
चड्ढा ने स्पष्ट किया कि एआई अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। मजबूत कम्प्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचे वाले देश भविष्य में विश्व पटल पर हावी होंगे। प्रसंस्करण शक्ति और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही एआई युग के नेताओं का फैसला करेगा।
उन्होंने एआई क्षेत्र में तीन प्रमुख एकाधिकारों की ओर ध्यान दिलाया- डिजाइन पर कुछ कंपनियों का कब्जा, उत्पादन का सीमित भौगोलिक केंद्रण और अमेरिका जैसी नीतियों से निर्यात प्रतिबंध। भारत इन क्षेत्रों में अभी पीछे है, लेकिन मानव संसाधन में उसकी ताकत बेजोड़ है।
विश्व एआई विशेषज्ञों के लिए भारत की ओर रुख हो रहा है, लेकिन चड्ढा ने चेताया कि प्रतिभा अकेले काफी नहीं। वैश्विक मुकाबले के लिए उच्च स्तरीय कम्प्यूटिंग पहुंच, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता और मजबूत घरेलू ढांचा जरूरी है।
20वीं सदी में तेल-गैस-इस्पात ने शक्ति संतुलन बदला, ठीक वैसे ही 21वीं में एआई और सेमीकंडक्टर करेंगे। भारत को निर्णायक कदम उठाने होंगे। समिट इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।