
नई दिल्ली के एक प्रमुख एआई सम्मेलन में एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब मात्र सात वर्षीय रणवीर सिंह सचदेवा ने मंच संभाला। सबसे कम उम्र के मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने भारतीय प्राचीन दर्शन और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मेल को बखूबी बयान किया।
2017 में जन्मे रणवीर ने अपने भाषण में युवाओं की भावी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के शाश्वत सिद्धांत तकनीकी जगत को नई दिशा दे सकते हैं। विभिन्न देशों के एआई मॉडल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत के प्रयासों को रेखांकित किया।
उन्होंने एक नए भारतीय एआई मॉडल का उदाहरण देकर बताया कि ये नवाचार अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत बनाएंगे। जीडीपी वृद्धि में इनकी भूमिका को उन्होंने स्पष्ट किया।
तकनीक के तीव्र परिवर्तन पर चर्चा करते हुए रणवीर ने कहा कि एआई का सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ियों पर होगा। डिजिटल युग में पले मिलेनियल्स, जेन-जेड और अल्फा इस क्रांति के प्रमुख वाहक बनेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि डेवलपर्स, सरकारें और संस्थाओं के वर्तमान फैसले आने वाली पीढ़ियों के जीवन को निर्धारित करेंगे। सम्मेलन में नीति विशेषज्ञ, उद्योगपति, शोधकर्ता, स्टार्टअप्स और छात्र एकत्र हुए, जहां एआई की नीतियां, नवाचार और उपयोग पर गहन विमर्श हुआ।
रणवीर का संदेश सभी के दिलों में उतर गया, जो दर्शाता है कि युवा दृष्टिकोण एआई को भारतीय मूल्यों से जोड़ सकते हैं।