Agra के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव रहनकलां में बुधवार को हुई एक भयानक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक युवक ने अपने भाई की साली को गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न सिर्फ दो परिवारों को तबाह कर दिया, बल्कि पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया।
क्या हुआ था?
बुधवार दोपहर करीब 11:30 बजे की बात है। युवक दीपक अपने भाभी के घर पहुंचा। घर में उस समय भाभी की छोटी बहन ज्योति, उनकी मां सुनीता देवी और पुत्रवधू मौजूद थीं। दीपक ने सामान्य तरीके से नाश्ता किया, फल खाए और फिर अचानक ही उसने ज्योति का हाथ पकड़कर एक कमरे में घसीट लिया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
जब सुनीता देवी ने शोर सुना और दरवाजा खोलने की कोशिश की, तभी अंदर से गोलियों की आवाज सुनाई दी। पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ना पड़ा। अंदर का नजारा देखकर सभी स्तब्ध रह गए—ज्योति की हत्या कर दी गई थी, और दीपक ने खुद को भी गोली मार ली थी।
परिवार पर क्या बीती?
घटना के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। ज्योति के पिता किशनवीर और मां सुनीता देवी बेहोश हो गए। वहीं, दीपक के पिता अजुद्दी प्रसाद सदमे में आ गए। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए आगरा ले जाया गया, जहां रात में ही जांच पूरी कर ली गई।
अगले दिन, ज्योति का अंतिम संस्कार उसके छोटे भाई उमेश ने कराया। वहीं, दीपक की चिता को उसके भतीजे (बड़े भाई अभिषेक के चार महीने के बेटे) के हाथों स्पर्श कराकर मुखाग्नि दी गई। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
क्या थी वजह?
ग्रामीणों और परिजनों के मुताबिक, दीपक ज्योति से एकतरफा प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। लेकिन ज्योति के परिवार ने इस रिश्ते से साफ इनकार कर दिया था। दीपक के पिता ने भी इस शादी का विरोध किया था, क्योंकि वे एक ही परिवार में दो बेटियों की शादी नहीं करना चाहते थे।
इसी मनोवैज्ञानिक दबाव और निराशा में दीपक ने यह कदम उठाया। उस दिन वह बस इतना ही बोला था— “चाचा, बाल कटवाने बाजार जा रहा हूं।” लेकिन वह कभी लौटकर नहीं आया।
पुलिस क्या कहती है?
इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद परिवार वाले सदमे में हैं और उन्होंने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और पुलिस गवाहों के बयान दर्ज कर रही है।
गांव में क्या है माहौल?
रहनकलां गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा हुआ है। लोगों के बीच इस घटना की चर्चा है। कुछ लोग दीपक के कदम को गलत बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि अगर परिवार ने उसकी भावनाओं को समझ लिया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
क्या यह पहली ऐसी घटना है?
नहीं, भारत में एकतरफा प्यार और रिश्तों में नकारे जाने के बाद ऐसी हिंसक घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि युवाओं में भावनात्मक स्थिरता की कमी और गुस्से पर काबू न रख पाने की प्रवृत्ति ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है।
क्या हो सकता है समाधान?
समाजशास्त्रियों का कहना है कि युवाओं को भावनात्मक मजबूती देने के लिए परिवार और शिक्षण संस्थानों को आगे आना चाहिए। साथ ही, प्रेम संबंधों में असफल होने पर मनोचिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
अंतिम शब्द
यह घटना न सिर्फ दो परिवारों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है। प्रेम और घृणा के बीच की पतली रेखा को समझना जरूरी है, वरना ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती रहेंगी। आगरा पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तैयार हैं?