Pilibhit , उत्तर प्रदेश। जंगल के राजा हाथियों ने इंसानों के साथ जंग छेड़ दी है। पिछले कुछ महीनों से नेपाली हाथियों का एक झुंड पीलीभीत के जंगलों और खेतों में अपना आतंक फैला रहा है। इन हाथियों ने किसानों की मेहनत से तैयार गेहूं की फसलों को तहस-नहस कर दिया है। वन विभाग के 40 कर्मचारियों की टीम भी इन्हें खदेड़ने में नाकाम रही है। अब सवाल यह है कि क्या किसानों की फसलों को बचाने का कोई रास्ता निकलेगा?
नेपाल से आए हाथियों ने मचाया तबाही
इस साल की शुरुआत में नेपाल के शुक्लाफांटा वन्यजीव अभयारण्य से 5 हाथियों का एक झुंड पीलीभीत में घुस आया। उत्तराखंड की सीमा पर एक बाघ के हमले के बाद यह झुंड दो हिस्सों में बंट गया। बिछड़े हुए हाथी अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व के माला और महोफ रेंज में घूम रहे हैं। इन हाथियों ने जंगल से बाहर निकलकर गजरौला इलाके के खेतों में हमला बोल दिया।
किसानों की मेहनत पर पानी फिरा
सोमवार की रात ये हाथी वैबहा फार्म के पास पहुंच गए। अवतार सिंह सरोआ के खेत में घुसकर इन्होंने पकी हुई गेहूं की फसल को रौंद डाला। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के मौके पर यह नुकसान उनके लिए बड़ा झटका है। सिर्फ फसल ही नहीं, हाथियों के आवागमन से जंगल की चेनलिंक फेंसिंग भी टूट गई है।
वन विभाग की कोशिशें भी हुईं नाकाम
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने इन हाथियों को वापस नेपाल की ओर खदेड़ने की पूरी कोशिश की है। माला रेंज के अधिकारी रॉबिन सिंह के मुताबिक, 40 वनकर्मियों की टीम लगातार निगरानी में जुटी हुई है। लेकिन हाथी अब भी माला रेंज में ही डेरा जमाए हुए हैं। ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है, लेकिन हाथियों के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे।
क्या है समाधान?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के झुंड को वापस जंगल में ले जाने के लिए और अधिक मजबूत रणनीति बनाने की जरूरत है। कुछ लोगों का सुझाव है कि हाथियों को भगाने के लिए ड्रम बजाने, आग जलाने या रबर की गोलियां चलाने जैसे तरीके अपनाए जाएं। लेकिन अब तक इनमें से कोई भी तरीका पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुआ है।
किसानों का गुस्सा फूटा
इधर, फसलों के बर्बाद होने से किसानों का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। कई किसानों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही इन हाथियों पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
क्या कहता है कानून?
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी एक संरक्षित प्रजाति है। ऐसे में इन्हें मारना गैरकानूनी है। लेकिन जब जंगली जानवर इंसानों के लिए खतरा बन जाएं, तो सरकार को किसानों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। क्या उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगी?
आगे की राह क्या?
अब सबकी नजरें वन विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं। अगर जल्द ही इन हाथियों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो किसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव बढ़ सकता है। क्या पीलीभीत में एक बार फिर इंसान और जानवरों के बीच जंग छिड़ेगी? यह सवाल अब हर किसी के जहन में है।
यह खबर पीलीभीत से सीधे आप तक पहुंची है। इस मामले की और जानकारी मिलते ही हम आपको अपडेट करेंगे।