उत्तर प्रदेश के विद्युत विभाग में काम करने वाले outsourced employees के लिए राहत भरी खबर आ सकती है। प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, मेरठ के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए। यह फैसला उन कंप्यूटर ऑपरेटर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो 8 साल से अधिक समय से विभाग में सेवा दे रहे हैं लेकिन हाल ही में उन्हें बी-श्रेणी में डालकर उनका वेतन कम कर दिया गया है। इस फैसले से कर्मचारियों में रोष था, जिसे लेकर उन्होंने मंत्री कपिल देव से गुहार लगाई।
बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों का बढ़ता असंतोष!
प्रदेश के मुजफ्फरनगर और शामली जिले में विद्युत विभाग के अंतर्गत कंप्यूटर ऑपरेटर्स की नई निविदा निकाली गई थी। लेकिन इस प्रक्रिया में ए-श्रेणी के अनुभवी कर्मचारियों की संख्या को घटाकर उन्हें बी-श्रेणी में डाल दिया गया, जिससे न केवल उनका वेतन घट गया बल्कि उनके कार्य अधिकार भी सीमित हो गए। इस बदलाव के कारण न सिर्फ कर्मचारियों में नाराजगी थी, बल्कि इससे विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ सकता था।
कर्मचारियों ने किया मंत्री से गुहार, मिला त्वरित आश्वासन!
अपनी समस्याओं को लेकर आउटसोर्सिंग के जरिए विद्युत विभाग में काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर्स ने नगर विधायक एवं स्वतंत्र प्रभार मंत्री कपिल देव अग्रवाल के आवास पर गांधीनगर, मुजफ्फरनगर में मुलाकात की। कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे 8-10 वर्षों से विभाग की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन अचानक श्रेणी में बदलाव से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा।
मंत्री ने मौके पर ही किया बड़ा एक्शन!
कर्मचारियों की समस्याओं को सुनते ही मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने तुरंत पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, मेरठ के प्रबंध निदेशक को फोन कर वार्ता की और आदेश दिए कि इस मामले का शीघ्र समाधान निकाला जाए। मंत्री ने कर्मचारियों को भरोसा दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्या हैं इस पूरे विवाद की जड़ें?
बिजली विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर्स की नई निविदा प्रक्रिया में अनुभवी कर्मचारियों की संख्या घटाकर उन्हें बी-श्रेणी में डालना ही इस असंतोष की मुख्य वजह बनी। यह न केवल इन कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इससे विभाग की दैनिक कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
इससे पहले भी विद्युत विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था, जिनमें शामिल हैं:
नियमित वेतन न मिलना
संविदा पर होने के कारण भविष्य की असुरक्षा
अनुभवी कर्मचारियों के वेतन में कमी
स्थायी नियुक्ति की मांग
अगर समस्याओं का हल नहीं निकला तो क्या होगा?
अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आउटसोर्स कर्मचारी आंदोलन कर सकते हैं। इससे विद्युत विभाग के कार्यों पर भी असर पड़ सकता है और आम जनता को बिजली सेवाओं में बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
कपिल देव अग्रवाल का बड़ा बयान: ‘युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना प्राथमिकता’
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं के कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि उनका विभाग, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता विभाग, प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगारपरक प्रशिक्षण देने का काम कर रहा है।
“हमारा उद्देश्य सिर्फ उन्हें कुशल बनाना ही नहीं, बल्कि इतना सक्षम बनाना है कि वे स्वरोजगार कर दूसरों को भी रोजगार दे सकें।”
मंत्री का यह बयान बताता है कि सरकार न केवल संविदा कर्मियों को राहत देने की दिशा में काम कर रही है, बल्कि युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है।
क्या सरकार जल्द ले सकती है बड़ा फैसला?
सूत्रों की मानें, तो राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में एक नई नीति लाई जा सकती है, जिससे संविदा कर्मियों को अधिक सुरक्षा और बेहतर वेतन मिल सके। इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक जल्द हो सकती है।
आगे क्या होगा?
आउटसोर्स कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला संभव!
सरकार संविदा कर्मियों की सुरक्षा के लिए नीति बनाएगी?
आंदोलन की नौबत आई तो क्या होगी सरकार की प्रतिक्रिया?
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में कब और क्या बड़ा कदम उठाएगी। कर्मचारियों की उम्मीदें अब मंत्री कपिल देव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हैं।