Muzaffarnagar में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्टेप फार्मिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने वर्मी कंपोस्ट प्लांट लगाने के नाम पर 500 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। इस जालसाजी में सहारनपुर की एक कंपनी शामिल थी, जिसने किसानों और निवेशकों को जैविक खेती के नाम पर लालच दिया, भरोसा जीता और फिर पैसे लेकर फरार हो गई।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, और आखिरकार कंपनी के एमडी हाजी इकराम, प्रमोटर जुनेद अंसारी (ढंढेरा, रुड़की) और खालिद अंसारी (गंगोह) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
कैसे हुआ किसानों के साथ धोखा?
करीब एक साल पहले कंपनी ने मुज़फ्फरनगर में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया था। इस इवेंट में स्टेप फार्मिंग इंडिया के प्रमोटर्स ने बताया कि वे “जैविक भारत मिशन” के तहत काम कर रहे हैं और बेरोजगारी मिटाने के लिए किसानों को रोजगार का अवसर दे रहे हैं।
कंपनी ने दावा किया कि वह किसानों की ज़मीन पर वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) प्लांट लगाएगी और जो किसान ज़मीन नहीं दे सकते, उनके लिए खुद की ज़मीन पर खाद तैयार करेगी।
झांसे में आए सैकड़ों किसान और बेरोजगार
कंपनी के झूठे वादों ने कई किसानों और बेरोजगारों को अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने निवेशकों से कहा:
अगर कोई व्यक्ति ₹1 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसे हर महीने एक तय रकम दी जाएगी।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कंपनी “ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स” के स्टोर भी खोलेगी।
किसानों को खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे आगे भी इस बिजनेस को जारी रख सकें।
कई किसानों ने कंपनी पर भरोसा किया और अपनी गाढ़ी कमाई लगा दी। कुछ लोगों ने तो अपने परिचितों को भी इस स्कीम में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कुछ महीनों बाद, जब निवेशकों को पैसा मिलना बंद हो गया, तो ठगी का राज़ खुलने लगा।
सैकड़ों लोगों के सपने चकनाचूर, आरोपी फरार!
जब लोगों को अहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तब उन्होंने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन,
कंपनी के दफ्तर में ताले लटके मिले।
प्रमोटर्स और एमडी फोन उठाना बंद कर चुके थे।
वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज भी गायब कर दिए गए।
इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब तक 25 से अधिक पीड़ित सामने आ चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
किस-किस ने गंवाए अपने पैसे?
इन पीड़ितों में शामिल हैं:
- राजकुमार (इंदिरा कॉलोनी)
- मनमोहन गोयल (नई मंडी)
- हिमांशु उपाध्याय (रामपुरी)
- विकास कुमार (सुमन विहार)
- सचिन कुमार जायसवाल (संगम विहार)
- विकास अग्रवाल (सुभाष नगर)
- धन सिंह (मल्हूपुरा)
- भूपेंद्र सिंह (कछौली)
- सतीश कुमार (मोरना)
- नवनीत कुमार (गांधी कॉलोनी)
- सोनिया (आनंदपुरी)
- अमित अग्रवाल (पटेल नगर)
- दिलशाद (केवलपुरी)
- हरेंद्र (जसवंतपुरी)
- मतलूब अली (बेहड़ा सादात)
और कई अन्य, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इस स्कीम में लगा दी थी।
पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपी की तलाश जारी!
एसपी क्राइम प्रशांत कुमार ने जांच की पुष्टि करते हुए बताया कि “यह एक सुनियोजित ठगी है, जिसमें भोले-भाले किसानों को बड़े मुनाफे का लालच देकर फंसाया गया”।
- आरोपी फरार हैं और पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही है।
- मामले से जुड़े दस्तावेज और ट्रांजेक्शन डिटेल खंगाली जा रही है।
- आर्थिक अपराध शाखा भी इस केस की जांच में जुड़ गई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
1⃣ फ्रॉड के बढ़ते मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्गेनिक फार्मिंग और स्टार्टअप्स के नाम पर कई फर्जी कंपनियां लोगों को ठगने में लगी हैं।
2⃣ निवेश करने से पहले करें जांच
किसानों और निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले:
कंपनी का रजिस्ट्रेशन चेक करें।
कंपनी का पुराना रिकॉर्ड और बैकग्राउंड जांचें।
कानूनी सलाहकार से राय लें।
किसानों से अपील: सतर्क रहें!
यह घटना एक सबक है कि बिना पूरी जानकारी के किसी भी स्कीम में पैसा न लगाएं। अगर कोई कंपनी आपको गैर-हकीकत लगने वाले मुनाफे का वादा कर रही है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
कानूनी कार्रवाई में तेजी की मांग
पीड़ितों का कहना है कि वे अपनी रकम वापस पाने के लिए सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
इस घोटाले से जुड़ी हर अपडेट के लिए जुड़े रहें!
अगर आपको भी इस कंपनी ने ठगा है, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
अपने अनुभव कमेंट सेक्शन में बताएं और दूसरों को सतर्क करें।
इस खबर को शेयर करें ताकि और लोग ऐसे जालसाजों से बच सकें!
धोखाधड़ी करने वालों का पर्दाफाश जारी रहेगा!