सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री Azam Khan की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उनके खिलाफ एक और मामला सामने आया है, जिसमें उन्हें धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने और अपराधिक षडयंत्र रचने का आरोपी बनाया गया है। इस मामले में शुक्रवार को विवेचक ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सपा नेता के खिलाफ वारंट जारी करने की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने आजम खां को 27 जनवरी को पेश होने का आदेश दिया है।
क्वालिटी बार मामले का पूरा घटनाक्रम
इस मामले की शुरुआत 21 नवंबर 2019 को सिविल लाइंस थाने में हुई। राजस्व निरीक्षक अनंग राज सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोप है कि आजम खां ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए जिला सहकारी संघ (डीसीडीएफ) की 302 वर्ग मीटर जमीन, जिस पर क्वालिटी बार बना था, अपनी पत्नी तजीन फात्मा के नाम किराए पर दे दी।
शिकायत के अनुसार, जमीन को ट्रांसफर करने के लिए उस समय के डीसीडीएफ चेयरमैन सैयद जफर अली जाफरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। यह बैठक विवादों में घिरी रही, क्योंकि इसे फर्जी बताया गया। इस पूरे मामले में पुलिस ने आजम खां, उनकी पत्नी तजीन फात्मा, और बेटे अब्दुल्ला आजम को आरोपी मानते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
अग्रिम विवेचना में खुलासे
कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने इस मामले की विस्तृत विवेचना की मांग की। विवेचना की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर गजेंद्र त्यागी को सौंपी गई। उन्होंने आगे की जांच में पाया कि आजम खां ने अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए सरकारी जमीन को निजी हितों के लिए प्रयोग किया।
विवेचक ने कोर्ट में बताया कि क्वालिटी बार के अभिलेखों से छेड़छाड़ की गई, साक्ष्यों को नष्ट किया गया और पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा षडयंत्र रचा गया। इसके आधार पर विवेचक ने शुक्रवार को कोर्ट से सपा नेता को समन जारी करने की मांग की।
27 जनवरी को होगी सुनवाई
शुक्रवार को कोर्ट ने विवेचक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए आजम खां को 27 जनवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। यह तारीख आजम खां के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अगर उन पर लगे आरोप साबित होते हैं, तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
आजम खां के खिलाफ पहले से ही दर्ज हैं कई मामले
यह पहली बार नहीं है जब Azam Khan विवादों में घिरे हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। उनके ऊपर जमीन कब्जाने, धार्मिक भावनाएं आहत करने और अन्य गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त है।
उनकी पत्नी तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम भी कई मामलों में आरोपी हैं। हाल ही में अब्दुल्ला आजम को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में दोषी ठहराया गया था। यह मामला आजम खां और उनके परिवार के लिए एक और झटका साबित हो सकता है।
सियासी समीकरणों पर असर
आजम खां समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे हैं। उनकी गिनती पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में होती थी। लेकिन लगातार कानूनी परेशानियों ने न सिर्फ उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पार्टी की सियासी ताकत पर भी असर डाला है।
वर्तमान में, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन मामलों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, आजम खां के समर्थकों का कहना है कि यह सब राजनीतिक साजिश के तहत हो रहा है।
क्वालिटी बार मामला: राजनीतिक षड्यंत्र या कानून का शिकंजा?
क्वालिटी बार मामला सपा नेता के खिलाफ गंभीर आरोपों में से एक है। इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वास्तव में कानून का शिकंजा है या फिर विपक्षी दलों द्वारा रची गई साजिश।
यह देखना दिलचस्प होगा कि 27 जनवरी को कोर्ट में क्या होता है। क्या आजम खां को राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी?
समाजवादी पार्टी की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में सपा की तरफ से कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी फिलहाल इस मसले से दूरी बनाए रखना चाहती है, ताकि आगामी चुनावों में इसका असर न पड़े।
लेकिन, आजम खां के समर्थक इसे राजनीतिक षड्यंत्र मानते हुए कह रहे हैं कि सरकार अपने विरोधियों को खत्म करने की साजिश कर रही है।
क्या कहता है कानून?
क्वालिटी बार मामले में जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, वे बेहद गंभीर हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो आजम खां को लंबी सजा हो सकती है। साथ ही, उनके राजनीतिक करियर पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।