प्रयागराजपूरे प्रदेश में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है, जिसमें प्रदेश के जिला अदालतों अधिकरण और परिवार न्यायालय के लिए नई गाइडलाइन जारी किया गया है। हाईकोर्ट के गाइडलइन अनुसार तय मुकदमों की सुनवाई अब सिर्फ वर्चुअल मोड से की जाएगी। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में भौतिक रूप से आकर कोई मुकदमा नहीं सुना जाएगा। इसके अलावा कोर्ट ने अधिवक्ताओं और वादाकरियों के प्रवेश पर कोर्ट में रोक लगा दी है।2020 के अपेक्षा 2021 में ज्यादा संक्रमणपूरे उत्तर प्रदेश में 2020 के अपेक्षा 2021 में कोविड-19 का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। इसी बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नई कोविड-19 गाइड लाइन जारी की है। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा लखनऊ में उसके बाद प्रयागराज फिर बनारस और उसके बाद कानपुर में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इसी के चलते हाईकोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए स्टांप वेंडर और एडवोकेट क्लर्क के अदालत परिसर में प्रवेश करने पर भी रोक लगा दी है।इस दौरान सिर्फ जमानत अग्रिम, जमानत रिमांड और अति आवश्यक मुकदमे ही कोर्ट में सुने जाएंगे। इसके लिए एक या दो से अधिक न्यायिक अधिकारी की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी और अगर ड्यूटी भी लगाई जाती है तो रोटेशन के आधार पर ही कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी। कोर्ट में सभी मुकदमे सिर्फ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिला अदालत या न्यायिक अधिकारी के आवास से सुने जाएंगे। बाकी बचे मामलों के लिए पहले से जारी गाइडलाइन लागू रहेगी। पूर्व में हाईकोर्ट ने वर्चुअल और फिजिकल मोड से मुकदमों की सुनवाई की इजाजत दी थी। आपको बता दें हाईकोर्ट नहीं संक्रमण की बढ़ती दर को देखते हुए यह आदेश संशोधित किया है।
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